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Tuesday, July 5, 2011

(76) गंगे तुम्हारी वन्दना

पतित पावनी गंगा के पुनरोद्धार  के लिए अनशन रत रहे, संत निगमानंद की मृत्यु पर उस हुतात्मा के माँ गंगा के प्रति देहदान को श्रद्धांजलि स्वरुप ये पंक्तियाँ -

गंगे तुम्हारी वन्दना! गंगे तुम्हारी वन्दना !
हे पतित पावनि, शुभगते, शत-शत तेरी अभिनन्दना.

माँ भारती की सहचरी, सहजीवनी, सहवासिनी
सुखदा, वरा, नीरासदा, कलि कलुष पातक नाशिनी 
माँ भारती जैसा ही तेरा, स्नेह सबको  मातृवत 
वह देवकी, यशुमति है तू, अदभुत तेरी आलिंगना 
गंगे तुम्हारी वन्दना! गंगे तुम्हारी वन्दना !

सुजला तू ही, सुफला तू ही, तू मातु मलयज शीतला 
तू पाल्या, तू तारिणी , संपन्न तू षोडश कला 
हे सरस सलिला , हम अकिंचन क्या तुझे देंगें भला 
हैं भाव से तेरे जननि,स्वीकार अक्षत-चंदना
गंगे तुम्हारी वन्दना! गंगे तुम्हारी वन्दना !

हे सुरसरी, भागीरथी, विष्णुप्रिया, देवापगा  
अविरल रहे धारा तेरी, माँ पग न अपने डगमगा 
तेरा मलिन मुख देख सारा देश आशंकित-व्यथित 
क्या एक 'निगमानंद' प्रस्तुत हम सभी की अर्पणा
गंगे तुम्हारी वन्दना! गंगे तुम्हारी वन्दना !

23 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत संवेदनशील रचना

रविकर said...

जय माँ गंगे ||

रविकर said...

हे सुरसरी, भागीरथी, विष्णुप्रिया, देवापगा अविरल रहे धारा तेरी, माँ पग न अपने डगमगा तेरा मलिन मुख देख सारा देश

जय माँ गंगे ||

रविकर said...

हे सुरसरी, भागीरथी, विष्णुप्रिया, देवापगा अविरल रहे धारा तेरी, माँ पग न अपने डगमगा तेरा मलिन मुख देख सारा देश

जय माँ गंगे ||

S.N SHUKLA said...

Dhanywad,Sangeeta ji

Dhanywad, Ravikar ji
aabhar ap dono logon ka .

समयचक्र said...

जय गंगे माँ ...

मनोज कुमार said...

एक सच्ची श्रद्धांजलि।

Ankur Jain said...

sundar shabdon se saji bhavmayi prastuti...

Anonymous said...

संत निगमानंद जी को सादर श्रद्धांजलि - आपको साधुवाद - जय गंगा मैया

S.N SHUKLA said...

Mahendra MishraJI,
Manoj ji,
Ankur Jain ji,
Rakesh Kaushik ji,

aap sab ka bahut- bahut abhar , dhanywad .

अनामिका की सदायें ...... said...

बहुत प्रभावोत्पादक शब्द व्यंजना से माँ गंगे को श्रधांजलि दी है. आपकी लेखनी को नमन.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

हर हर गंगे ......जय माँ गंगे

बहुत पवित्र ,प्रवाहमयी , भावपूर्ण वंदना

गंगापुत्र निगमानंद जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा

डॉ. मोनिका शर्मा said...

संवेदनशील पावन भाव संजोये हैं आपने....

Urmi said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है!

S.N SHUKLA said...

Anamika ji,
Surendra Singh ji,
Monika ji,
Babli ji,
aap logon ke utsahvardhan ka bahut- bahut aabhari hoon, dhanywad .

Unknown said...

बहुत ही संवेदनशील रचना...मन भर आया ...
एक निर्मल श्रधांजलि.....जय माँ गंगे ...
नमो गंगे तरंगे पाप हारी
सदा जय हो सदा जय हो तुम्हारी...
सादर अभिनन्दन !!!

संध्या शर्मा said...

संत निगमानंद जी को सादर श्रद्धांजलि.......
संवेदनशील रचना....

Chaitanyaa Sharma said...

जय माँ गंगे....

केवल राम said...

गंगा जैसी पवित्र नदी को समर्पित आपकी यह रचना मन को विभोर कर देती है ..... परम पूजनीय संत निगमानंद जी को सादर श्रद्धांजलि ...आपका आभार

S.N SHUKLA said...

Shree Prakash Dimari ji, Sandhya Sharma ji, Kewal Ram ji aur chhote se, pyare se Chaitany Babu

aap sabhi ko dhanywad

Anupama Tripathi said...

आपकी किसी पोस्ट की चर्चा शनिवार (09-07-11 )को नयी-पुरानी हलचल पर होगी |कृपया आयें और अपने बहुमूल्य सुझावों से ,विचारों से हमें अवगत कराएँ ...!!

navgeet said...

शुक्ल जी! बहुत अच्छी गंगा की वन्दना है, "अभिन्न्दना" शब्द का क्या अभिप्राय है? कहीं यह "अभिनन्दना" तो नहीं है को सही कर दीजिये।

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) said...

सुंदर शब्द-चयन ने कविता के भावों को समृद्ध कर दिया है.