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Saturday, July 2, 2011

(75) रिमझिम ये फुहारें आईं

 पहली बरसात की रिमझिम ये फुहारें आईं ,
सूखती  धरती  के  चेहरे   पे  बहारें आईं  /

पी कहाँ  प्यासे  पपीहे  ने पुकारा  था कल ,
सूखते झील, नदी, नालों, ने मागा था जल,
पेड़- पौधे भी थे प्यासे , लिए बोझिल आँखें ,
सबके  चेहरों  पे  उम्मीदें  व  करारें लाईं /

दादुरों  की नयी  पीढ़ी  ने  मचाई  हलचल ,
आ गया प्यार मेरा, डाल से बोली कोयल  ,
छत पे चिड़ियों का चहकता हुआ कलरव गुंजन ,
तितलियाँ झूमती फूलों पे  फिरें इतरायीं  /

घास मुसकाई तो मिट्टी ने उड़ाई खुशबू ,
हवा  में  गंध  घुली, झूमती आयी खुशबू  ,
बादलों की घटा में धूप भी सहमी- सहमी ,
तपन घटी ,  मयूर मन में बजी शहनाई /

थोड़ी  बूँदों  ने  किसानों  के  खिलाये  चेहरे ,
अब तो हर बेल के सिर, फूल के होंगे सेहरे   ,  
उर्वरा  उगलेगी  सोना  किसान  के  घर में .
अनगिनत सुनहरे ख़्वाबों की कतारें लाईं  /


12 comments:

मनोज कुमार said...

आपने तो बरसात का पूरा समां ही बांध दिया है। रही सही कसर चित्र ने पूरी कर दी है।

मनोज कुमार said...

आपने तो बरसात का पूरा समां ही बांध दिया है। रही सही कसर चित्र ने पूरी कर दी है।

शालिनी कौशिक said...

थोड़ी बूँदों ने किसानों के खिलाये चेहरे ,अब तो हर बेल के सिर, फूल के होंगे सेहरे , उर्वरा उगलेगी सोना किसान के घर में .अनगिनत सुनहरे ख़्वाबों की कतारें लाईं /
barsat ka sundar varnan

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत रिम झिम फुहार ...

S.N SHUKLA said...

Manoj ji,
Shalini ji,
Sangeeta ji,
aap logon ka utsahvardhan hi prerna ka roop le kavita ke shabdon men dhalta hai. aabhari hoon ,bahut- bahut dhanywad

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी सुन्दर रचना के साथ-
वर्षा का यह रूप सभी को बहुत लुभाता है!

mridula pradhan said...

barsat par behad khoobsurat kavita.

S.N SHUKLA said...

Roop Chandra Shastri ji,
Mridula ji,
rachna achchhee lagi, aabhari hoon main, dhanywad .

रविकर said...

इक खूबसूरत रचना ||


बहुत-बहुत बधाई ||

शिखा कौशिक said...

vakai barsat sabko rahat pradan karti hai .ped paudhe ho ya manav .achchhi rachna

S.N SHUKLA said...

RAVIKAR JI,
SHIKHA JI,
Prashansa ke liye aabhar,dhanywad.

dipak kumar said...

very nice post
@chhotawriters.blogspot.com@