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Wednesday, October 12, 2011

(108) कभी तो रात जायेगी

कभी तो आयेगी  सुबह ,  कभी तो रात  जायेगी /
प्रकाश की किरण कभी तो,फिर से मुस्कुरायेगी  /

ये अन्धकार की निशा ,
मनोविकार की  निशा ,
विशाल भार सी निशा ,
दुरत पहाड़ सी  निशा  ,
हटेगी मार्ग  से कभी, कभी  तो   बीत जायेगी /
कभी तो आयेगी सुबह , कभी तो रात जायेगी /

दमक उठेगी हर गली ,
लगेगी   रोशनी भली ,
खिलेगी फिर कुसुम कली ,
पवन बहेगी मनचली ,
चहक उठेगी  कोकिला , हवा भी  गुनगुनायेगी /
कभी तो आयेगी सुबह , कभी तो रात जायेगी /

खुलेगी एक नयी डगर,
लगेगा गाँव भी  नगर ,
हर एक उदास होंठ पर,
खुशी की आयेगी लहर ,
हर एक खुशी भरा प्रहर , नियति तेरा बनायेगी /
कभी तो आयेगी सुबह , कभी तो रात जायेगी /

अगर न मन निराश हो ,
अगर  चुकी न आश हो ,
ह्रदय से   हार मान मत,
न मन   तेरा उदास  हो ,
तो फिर सुबह तेरे लिए ,   नया पयाम लायेगी /
कभी तो आयेगी सुबह , कभी तो रात जायेगी /

23 comments:

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति |
हमारी बधाई स्वीकारें ||

neemnimbouri.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अच्छी प्रस्तुति!

vidya said...

बहुत सुन्दर और गहरी रचना....दाद कबूल करें.

poonam said...

nayi umeed jagati rachna...bahut bahut badhai..

poonam said...

nayi umeed jagati kavita..bahut bahut badhai...

Babli said...

बहुत सुन्दर रचना ! अच्छी प्रस्तुति!

प्रवीण पाण्डेय said...

आशा का संचार करती प्रभावशाली पंक्तियाँ।

S.N SHUKLA said...

Ravikar ji,
Dr. Roopchandra shastree ji,


आप मित्रों की शुभकामनाएं मिलीं, मैं आभारी हूँ .

S.N SHUKLA said...

Vidya ji,
Poonam ji,
आपकी शुभकामनाओं का बहुत-बहुत आभार .

S.N SHUKLA said...

Babali ji,
Pravin pandey ji,

यह स्नेह सदा यूं ही मिलता रहे.

रश्मि प्रभा... said...

अगर न मन निराश हो ,अगर चुकी न आश हो ,ह्रदय से हार मान मत,न मन तेरा उदास हो ,तो फिर सुबह तेरे लिए , नया पयाम लायेगी कभी तो आयेगी सुबह , कभी तो रात जायेगी ... awashya

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

पवन बहेगी मनचली ....वाह !!! कल-कल छल-छल करती प्रवाहमयी कविता जब रश्मियों सा नर्तन करेगी तो वो सुबह जरूर आयेगी.

नीरज गोस्वामी said...

लाजवाब रचना...बधाई स्वीकारें

नीरज

वन्दना said...

बेहद प्रवाहमयी प्रभावशाली अभिव्यक्ति।

Maheshwari kaneri said...

बहुत गहरी और सुन्दर रचना.. बधाई

रविकर said...

समय चाहिए आज आप से, पाई फुर्सत बाढ़ - ताप से |
परिचय पढ़िए, प्रस्तुति प्रतिपल, शुक्रवार के इस प्रभात से ||
टिप्पणियों से धन्य कीजिए, अपने दिल की प्रेम-माप से |
चर्चा मंच

की शोभा बढे, भाई-भगिनी, चरण-चाप से ||

S.N SHUKLA said...

Rashmi prabha ji,
Arun Nigam ji,
Neeraj Goswami ji
आप मित्रों की शुभकामनाओं का बहुत-बहुत आभार .

S.N SHUKLA said...

Vandana ji,
Maheshwari Kaneri ji

स्नेह और समर्थन मिला, आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

Ravikar ji

चर्चा मंच में आमंत्रण का आभारी हूँ.

***Punam*** said...

bahut sundar...
vo subah zarooraayegi...!!

S.N SHUKLA said...

Poonam ji
AApakee shubhakamana ka bahut-bahut aabhar.

अनुपमा पाठक said...

आशान्वित परिकल्पना!

S.N SHUKLA said...

Anupama ji,

रचना की सराहना के लिए धन्यवाद