About Me

My photo
Greater Noida/ Sitapur, uttar pradesh, India
Editor "LAUHSTAMBH" Published form NCR.

हमारे मित्रगण

विजेट आपके ब्लॉग पर

Friday, April 13, 2012

(149) लौटि चलौ गाँउ ककुआ

हियाँ लागै न मनवा हमार ,  लौटि चलौ गाँउ ककुआ /
दिनु  बीतति  मनौ  पहारु ,  लौटि चलौ गाँउ ककुआ /

डगमगु  चालु हियाँ , बात गिटपिटिया ,
कान फोरू शोरु मचे , चलें फिटफिटिया ,
हुआं शान्ति औ सुख की बयारि ,  लौटि चलौ गाँउ ककुआ /
हियाँ  लागै  न  मनवा  हमार ,  लौटि चलौ गाँउ  ककुआ /

पानिहू बिकाल हियाँ , काँच के गिलसवा ,
सोनवा के भाऊ भवा ,  ऊख  केर रसवा , 
हुआं मुफ़त मां लुटब बहार , लौटि चलौ गाँउ ककुआ /
हियाँ लागै न मनवा हमार  , लौटि चलौ गाँउ ककुआ /

दुधवा के नाम पई बिकाल हियाँ पनिया ,
गोदिया के लाल पलें पूपसी की कनिया ,
हुआं दूध- दही की भरमार  ,  लौटि चलौ गाँउ ककुआ /
हियाँ लागै न मनवा हमार , लौटि चलौ गाँउ ककुआ /

छोरिहू  शहर  केरी , मेम  कै मेमनिया ,
बिटिया देहाति मानउ देबी महरनिया ,
हुआं सरगु  लगे  घरु- बारू , लौटि चलौ गाँउ ककुआ /
हियाँ लागै न मनवा हमार ,  लौटि चलौ गाँउ ककुआ /

                                         - एस. एन. शुक्ल  

30 comments:

Sunil Kumar said...

रचना के माध्यम से शहर की विसंगतियों का चित्रण , सुंदर

Vaanbhatt said...

एकदम स्पष्ट विचार...शहर की उब का खूबसूरत चित्रण...

dheerendra said...

दुधवा के नाम पई बिकाल हियाँ पनिया ,
गोदिया के लाल पलें पूपसी की कनिया ,
हुआं दूध- दही की भरमार ,
लौटि चलौ गाँउ ककुआ /

अनुपम भाव लिए सुंदर रचना...बेहतरीन पोस्ट के लिए शुक्ला जी, बहुत२ बधाई,..

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

shalini said...

इतने दिन बाद,इतनी मिठास भरी भाषा में , इतनी प्यारी सी कविता...... इस सुन्दर रचना के लिए बधाई!

शिखा कौशिक said...

bahut sateek shabdon me shahar ki jindgi ka varnan kiya hai aapne .aabhar

LIKE THIS PAGE AND WISH INDIAN HOCKEY TEAM FOR LONDON OLYMPIC

sushila said...

गाँव का सरल और आत्मीयता भरा जीवन शहर की तड़्क-भड़क से ज्यादा चुंबकीय आकर्षण रखता है। बधाई इस सुंदर रचना के लिए!

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

Maheshwari kaneri said...

मीठी- मीठी भाषा में अनुपम भाव लिए बहुत खुबसूरत प्रस्तुति...बधाई शुकला जी....

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

गाँव की यादें और शहर से लौट चलने का आह्वान... अपनी बोली.. अद्भुत गीत!!

प्रवीण पाण्डेय said...

आ अब लौट चलें..

संतोष त्रिवेदी said...

...अब गाँवनौ मा सब खतम हुई रहा है,मुदा हियाँ ते तौ ठीकै है.

बढ़िया रहा ककुआ !

mahendra verma said...

गांव की बोली की मिठास कुछ खास ही होती है।

S.N SHUKLA said...

SUNEEL JI,

आपसे इसी स्नेह की अपेक्षा थी .

S.N SHUKLA said...

Vanbhatt ji,

आपके स्नेह और समर्थन का धन्यवाद .

S.N SHUKLA said...

Dheerendra ji,
Shalini ji,
Shikha ji,

आप मित्रों की शुभकामनाओं का आभारी हूँ .

S.N SHUKLA said...

Shusila ji,
Shanti Garg ji,
आभारी हूँ आपके स्नेह और समर्थन का .

S.N SHUKLA said...

Maheshwari kaneri ji,
Varma ji,
Pandey ji,
आपके स्नेह , शुभकामनाओं का आभारी हूँ .

S.N SHUKLA said...

Santosh Trivedi ji,
Mahendra verma ji,

स्नेह मिला , आभारी हूँ .

Saras said...

बहुत सुन्दर बोली में सीधे सरल भाव .....बहुत मीठे लगे ..!!!

दिगम्बर नासवा said...

वाह .. आंचलिक भाषा भी कमाल है ... मन झूम झूम जाता है ..

आईने में said...

शुक्ला जी ,
राउर इ कविता दिल के छु गईल .
धन्यवाद

आईने में said...

शुक्ला जी,
राउर इ कविता दिल के छु गईल .
धन्यवाद

S.N SHUKLA said...

Saras ji,
Digambar Naswa ji,
आभार आपकी शुभकामनाओं का.

S.N SHUKLA said...

Rajiv ji,

आपके इस स्नेह का आभारी हूँ.

सतीश सक्सेना said...


@ लौट चलो गाँव ककुआ ...
गज़ब की अभिव्यक्ति , सोंधी महक गाँव की लिए हुए ...
वाकई यह कष्ट हमारे दिलों में कही न कहीं सालता रहा है, दम सा घुटता है यहाँ ..
आप की रचनाएं सहेजने योग्य हैं ...यह रचना तो लाखों में एक है !
आपकी रचनाओं को सम्मान मिलना चाहिए ..
शुभकामनायें !

S.N SHUKLA said...

Satish Saxena ji,

आपकी स्नेहिल शुभकामनाएं मिलीं , आभार.

Rakesh Anjaana said...

Aankhein Nam kar gayee aapki kalam shukla ji ...Mumbai mein rehta hoon par jaunpur ki yaad dilaa di aapne ..Is rachna k liye Dhanyawaad
Rakesh Tiwari

Rakesh Anjaana said...

Aankhein Nam kar gayee aapki kalam shukla ji ...Mumbai mein rehta hoon par jaunpur ki yaad dilaa di aapne ..Is rachna k liye Dhanyawaad
Rakesh Tiwari

Rakesh Anjaana said...

Aankhein nam kar gayee appki kalam shukla ji
Waise ti mumbai main rehta hoon Par jaunpur pahuncha diyaa appne

Dhanyawaad
Rakesh Tiwari

Rakesh Anjaana said...

Mumbai mein baithe baithe jaunpar ki sair karwaa de aur aankhein bhi nam ho gayeen .
Rakesh Tiwari