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Sunday, April 1, 2012

(146) उपचार क्या है ?

सोचिये कर्त्तव्य क्या है , और फिर अधिकार क्या है /
सोचिये  अन्याय , अत्याचार का  परिहार  क्या  है /
बहुत वातावरण  दूषित  है ,  न कहने  से  चलेगा  ,
सोचिये इस व्याधि , बाधा वृत्त का उपचार क्या है ?

मात्र आलोचक बने रहने से  कुछ होना नहीं  है /
याद रखना , और अब आगे विवश रोना नहीं है /
बस लुटेरों से सजग रहना व लड़ना वृत्त बनाओ ,
देश पर संकट हो तो , मुह ढाँपकर सोना नहीं है /

मात्र  अपने  ही लिए  जीना , नहीं जीना  है यारों /
चैन भारत का ,  दरिंदों  ने बहुत  छीना है  यारों  /
इसलिए अन्याय के प्रतिकार का संकल्प लो फिर ,
गरल का अब एक कतरा , भी नहीं पीना है यारों /

तुम बदल सकते हो सारा देश क्या , यह विश्व सारा /
भारती  के  लाल  जागो , विश्व  को  तुम  से सहारा /
जगदगुरु भारत, की संतति हो , स्वयं की शक्ति जानो ,
हे भगीरथ ! पलट दो ,  बहती हुई विपरीत धारा  /
                                       - एस. एन . शुक्ल 

48 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मात्र आलोचक बने रहने से कुछ होना नहीं है /
याद रखना , और अब आगे विवश रोना नहीं है /
बस लुटेरों से सजग रहना व लड़ना वृत्त बनाओ ,
देश पर संकट हो तो , मुह ढाँपकर सोना नहीं है /

सार्थक संदेश देती रचना ... मात्र आलोचक बन कर कुछ नहीं सुधारा जा सकता

Rajesh Kumari said...

apne uddeshay ko pahchanne aur jaagrat karne ke liye ek sundar prerna daai kavita.bahut sashaqt.

रविकर said...

शुभकामनायें |
बढ़िया प्रस्तुति |

expression said...

बहुत बढ़िया आह्वान...
जोश से ओतप्रोत रचना
सादर
अनु

dheerendra said...

वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब शुक्ला जी,
सुंदर सटीक सार्थक रचना,बेहतरीन प्रस्तुति,....

WELCOME TO MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढिया रचना है। बधाई स्वीकारें।

मनोज कुमार said...

विचारोत्तेजक रचना।

Mithilesh dubey said...

बहुत ही लाजवाब रचना

dinesh aggarwal said...

क्राँति का आवाहन करती सशक्त रचना को नमन

dinesh aggarwal said...

क्रांति का आवाहन करती सशक्त रचना को नमन...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

kyaa khoobsoorat hindi likhi hai aapne!!

Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) said...

जोशीला प्रेरक आह्वाहन..बहुत खूब !!

dheerendra said...

बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट,....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...

इमरान अंसारी said...

nice post sir.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय शुक्ल जी जोश देती हुयी कविता .. प्यारा सृजन ...काश लोग ठान लें ....
भ्रमर ५

Suresh kumar said...

man me ak naya josh paida karne wali khubsurat rachna....

प्रवीण पाण्डेय said...

आँच हृदय में जलती हो, तो परिवर्तन भी आयेगा।

S.N SHUKLA said...

Sangita ji,
Rajesh kumari ji,
Ravikar ji,


इसी तरह देतें रहें स्नेह ताकि सृजन का उत्साह बना रहे.

S.N SHUKLA said...

Expression ji,
Dheerendra ji,
P.S. Bali ji,


आभारी हूँ आपके उत्साहवर्धन का.

S.N SHUKLA said...

Mithilesh ji,
Dinesh Agrawal ji,

आप मित्रों से सदैव इसी स्नेह की अपेक्षा है.

S.N SHUKLA said...

Manoj Kumar ji,

आपका स्नेह और समर्थन पाकर सार्थक हुयी रचना.

S.N SHUKLA said...

Surendra Mulhid ji,
Brijendra Singh ji,

आपके ब्लॉग पर आगमन का स्वागत तथा शुभकामनाओं के लिए आभार.

S.N SHUKLA said...

Imaran Ansari ji,
Surendra Shukla ji,

आप मित्रों से सदैव इसी स्नेह की अपेक्षा है.

S.N SHUKLA said...

Suresh Kumar ji,
Pravin Pandey ji,

आपकी स्नेहिल शुभकामनाएं मिलीं, आभारी हूँ.

दिगम्बर नासवा said...

सच हैं अब समय आ गया है खुद खड़ा होना होगा ... व्यवस्था को बदलना होगा ... आलोचक बन्ने से कुछ नहीं होना ... सार्थक चिंतन ...

क्षितिजा .... said...

तुम बदल सकते हो सारा देश क्या , यह विश्व सारा /
भारती के लाल जागो , विश्व को तुम से सहारा /
जगदगुरु भारत, की संतति हो , स्वयं की शक्ति जानो ,
हे भगीरथ ! पलट दो , बहती हुई विपरीत धारा /

प्रेरणादायक रचना के लिए बधाई स्वीकारें ...

हरकीरत ' हीर' said...

१४६ ....?

और कितनी लम्बी चलेगी ये यात्रा ......?

शुभकामनाएं .....

Ragini said...

अंतर्मन को झकझोरने वाला सन्देश है....आपकी कवितायें मुझे हमेशा ही अच्छी लगती हैं.....सादर!

S.N SHUKLA said...

dIGAMBAR nASWA JI,

AABHAAR AAPAKE SNEH KAA.

S.N SHUKLA said...

kshitija ji,
Harkirat Heer ji,

स्नेह मिला, आभार.

S.N SHUKLA said...

Ragini ji,


आपके उत्साहवर्धन का आभारी हूँ.

jitendra singh said...

uncle wah wah kya likha he bahut sunder..
@rediffmail.com

सदा said...

वाह ...बहुत ही बढि़या।

Anupama Tripathi said...

कर्म पर बल देता ...बहुत सुंदर भाव ...
पिछले कई दिनों से आप का ब्लॉग खुलता नाहीं था ...!!बहुत दिनों बाद आपकी पोस्ट पढ़ पाई हूँ ...!!

Maheshwari kaneri said...

सार्थक संदेश देती हुई बढ़िया प्रस्तुति |

ऋता शेखर मधु said...

वाह! अति सुंदर...सिर्फ आलोचक बनने से काम नहीं चलेगा!

Poonam Agrawal said...

Behad khoobsurat kavita likhi hai aapne ... Dhanyavad...

Bas aise hi likhte rahiye ...

sm said...

बढ़िया प्रस्तुति |

S.N SHUKLA said...

jitendra
bachuaa aakhir khoj hee liyaa.

S.N SHUKLA said...

Sada ji,
Anupama ji,
Maheshwari ji,
आपका बहुत- बहुत आभार हौसला अफजाई के लिए, धन्यवाद.

S.N SHUKLA said...

MADHU JI,

आपका स्नेह, समर्थन प्राप्त हुआ , आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

poonam Agrawal ji,
SM ji

आपके ब्लॉग पर आगमन और समर्थन का आभारी हूँ.

संजय भास्कर said...

सुंदर शब्दावली प्रेरणादायक कविता ....रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

S.N SHUKLA said...

Sanjay Bhasker ji,
आभार आपके स्नेह का.

Vishaal Charchchit said...

अत्यंत सार्थक और यथार्थपरक रचना !!!!

S.N SHUKLA said...

Vishal ji,
blog par padhaarane aur samarthan pradaan karane kaa aabhaar.

nutan said...

Waah ! Behad sundar rachna! aapko badhai! Saarthak vichaar!

S.N SHUKLA said...

Nootan ji,

आभारी हूँ आपके स्नेह का.