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Thursday, September 13, 2012

(167) हिन्दी हमारी मातृभाषा है

ज्यों गंगा संग विविध नदियाँ , सरस्वति है , कालिंदी है  /
त्यों अपनी अन्य सखियों संग , बड़ी बहना सी हिन्दी है  /
इसी में  कृष्ण  का  शैशव ,  इसी  में  राम  का  वैभव ,
ये भारत भाल चन्दन  है , ये  भारत  माँ की  बिंदी है  /

यहाँ   उर्दू  है  ,  बंगाली  ,  मराठी  और  गुज़राती ,
तमिल, तेलगू , असमिया और मलयालम मेरी थाती /
गुरुमुखी , कोंकड़ी , कन्नड़ हैं, उड़िया , डोंगरी भी हैं  ,
हमें हरियाणवी , मैथिलि , मिजो भी ,मणिपुरी भाती /

सगी बहनें ये हिन्दी की , वो  माँ है  तो ये मासी  हैं  ,
कहा जाता  है  भाषाएँ  ये , संस्कृत  की  नवासी हैं  ,
न होती माँ से मासी कम , मिले समवेत अपनापन ,
हमें है गर्व खुद पर , क्योंकि हम बहु भाषाभासी हैं  /


महक तुलसी की हिन्दी में , यही कबीरा की बानी है ,
ये है  रसखान  का  अनुनय  , यहीं  मीरा  दीवानी है  ,
शिवा की  बावनी  भूषण , रचाते  हैं  यहाँ  विधि से ,
ये है जगनिक का आल्हाखण्ड , वीरों की कहानी है  /

महादेवी का निर्झर स्नेह , तो फक्कड़ निराला है  ,
यहाँ बच्चन की मधुशाला में, हाला और प्याला है ,
बिहारी , सूर , जयशंकर , घनानंद और रहिमन हैं ,
यहीं नागर के नटवर हैं , तो रतनाकर की माला है  /

जायसी , पन्त , केशव, देव , दिनकर और पदमाकर ,
गिनाएं नाम कितने , व्योम है , धरती है , यह सागर  ,
ये हिन्दी ! हिंद का गौरव , करोड़ों जन की आशा है  ,
न  भाषा मात्र  यह  ,  हिन्दी  हमारी  मातृभाषा  है /

                                 - एस एन  शुक्ल 

47 comments:

Ramakant Singh said...

कृपया संकलन हेतु यथा शीघ्र मेल करें

Ramakant Singh said...

कृपया संकलन हेतु यथा शीघ्र मेल करें

Dr.NISHA MAHARANA said...

sahi bat hai ...bahut acchi prastuti .....

dheerendra said...

मेरे विचार से,,,,,

है जिसने हमको जन्म दिया,
हम आज उसे क्या कहते है\
क्या यही हमारा राष्ट्रवाद - ?
जिसका पथ दर्शन करते है,
हे राष्ट्र्स्वामिनी निराश्रिता
परिभाषा इसकी मत बदलो,
हिन्दी है भारत की भाषा,
हिन्दी को हिन्दी रहने दो,,,,,,

RECENT POST -मेरे सपनो का भारत

kase kahun?by kavita verma said...

hindi diwas ki shubhkamnaye..

सुबीर रावत said...

Hindi Day की पूर्व संध्या पर आपको हिंदी चिंतन के लिए साधुवाद.

सुबीर रावत said...

Hindi Day की पूर्व संध्या पर आपको हिंदी चिंतन के लिए साधुवाद.

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत ही बढ़िया रचना | हिन्दी दिवस की शुभकामनायें |

शिखा कौशिक 'नूतन ' said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति .आभार

प्रवीण पाण्डेय said...

अपनी भाषा अपनी होती...बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति..

प्रतुल वशिष्ठ said...

'हिन्दी दिवस' पर आपने हिन्दी के पुजारियों को एक सूत्र में पिरोकर और हिन्दी की जननी, सहयोगी, सहभागी रही भाषाओं और बोलियों के प्रति आभार व्यक्त किया है.

आपके मन के इस भाव ने मेरे मन को आह्लादित कर दिया. आपकी इस काव्य-अर्चना में मैं भी मौन उपासक बन उपस्थित हूँ.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

हिन्दीदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (15-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

S.N SHUKLA said...

Ramakant singh ji,
Nisha Maharana ji,
आभार आपकी शुभकामनाओं का.

S.N SHUKLA said...

Dheerendra ji,
Kavita verma ji,

स्नेह मिला बहुत- बहुत आभार.

S.N SHUKLA said...

Subir Ravat ji,
Pradeep ji,
Shikha ji,

यह स्नेह मिलता रहे , यही अपेक्षा है .

S.N SHUKLA said...

Pravin pandey ji,
Pratul Vashisht ji,
Roopachand Shastri ji,

आपके समर्थन से सार्थक हुयी रचना .

Sharad Kumar said...

सुंदर कविता ....... साथ ही हिन्दी दिवस और हिन्दी पखवाड़े की ढेरों बधाई........

दिगम्बर नासवा said...

सार्थक चिंतन ...
होंदी दिवस पे काव्यात्मक अभिव्यक्ति की बधाई ...

Anupama Tripathi said...

bhavpoorna sundar rachna ...

Amrita Tanmay said...

उत्तम अभिव्यक्ति..बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

S.N SHUKLA said...

Sharad kumar ji,

रचना को साधुवाद देने के लिए धन्यवाद.

S.N SHUKLA said...

Digamber Naswa ji,
Anupama ji,

स्नेह मिला , आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

Amrita Tanmay ji,
आभार इस स्नेह के लिए.

Minakshi Pant said...

हिंदी भाषा को बहुत खूबसूरती से परिभाषित करती रचना | हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें |

आनन्द विक्रम त्रिपाठी said...

बहुत सुंदर सर ,क्या खूब कहा आपने --सगी बहनें ये हिंदी की ,वो माँ है तो ये मासी है । अपनी भाषा के रूप को प्रस्तुत करने का यह तरीका निराला है ।

रचना त्यागी said...

बेहद खूबसूरत रचना ! प्रशंसा के लिए शब्द नहीं हैं !!

रचना त्यागी said...

बेहद खूबसूरत रचना ! प्रशंसा के लिए शब्द नहीं हैं !!

S.N SHUKLA said...

Meenakshee ji,
Anand vikram ji,

इस प्रशंसा का आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

Rachana Tyagi ji,


आभार इस स्नेह के लिए .

देवेन्द्र पाण्डेय said...

हिंदी और देशज भाषाओं की महत्ता का खूब वर्णन किया है आपने। अच्छे लगे इस कविता के भाव। एक आपत्ति है..
हिंदी को माँ और दूसरी देशज भाषाओं को मौसी की उपमा मुझे नहीं जमी। वस्तुतः है इससे ठीक उल्टा। देशज भाषाएं ही प्रत्येक भारतीय की मातृभाषा है। हिंदी राष्ट्र भाषा है जिसका प्रमुख स्थान देना राष्ट्र को एकसूत्र में पिरोने के लिए आवश्यक है। जैसे सभी नदियों के जल सागर में आकर मिल जाते हैं वैसे ही सभी भाषाएं हिंदी को समृद्ध करती हैं।
...सरस्वति=सरस्वती।

Rewa said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति .....आभार

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

मेरी नई पोस्ट में आपका स्वागत है |
मेरा काव्य-पिटारा:बुलाया करो

rajendra sharma'vivek" said...

भारतीय भाषाओं में ,सब कुछ है संभव
हिंदी मन का भाव है ,हिंदी है अनुभव

shalini said...

दिल को भा गयी आपकी यह कविता.... हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओँ का क्या अद्भुत संगम कराया है आपने.... आभार!

shalini said...

दिल को भा गयी आपकी यह कविता.... हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओँ का क्या अद्भुत संगम कराया है आपने.... आभार!

Naveen Mani Tripathi said...

bahut hi sundar rachana sir .....bilkul hr pankti hindi ke liye naya vishwas de rhai hai...sadar badhai ke sath abhar bhi .

Jitendra Gupta said...

wah wah wah;;;
kya baat hai sir;;
antim stanza to kamal ka hai..
bahut sundar;;

S.N SHUKLA said...

Devendra pandey ji,
Reva ji,

स्नेह मिला , आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

Pradip Sahani ji,
शुभकामनाओं का आभार.

S.N SHUKLA said...

Shalini ji,

आभार आपके अपार स्नेह का .

S.N SHUKLA said...

Navinmani Tripathi ji,
Rajendra Gupta ji,

इस स्नेह का बहुत- बहुत आभार .

Aditipoonam said...

बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना -सच ही तो माँ और मासियाँ ही तो है फिर ये झगडा किसके लिए

S.N SHUKLA said...

Aditipoonam ji,

ब्लॉग पर आगमन और समर्थन का आभार.

मैं कौन हूँ कहाँ से आया और कहाँ मुझे है जाना..... said...

बेहतरीन रचना ... धन्यवाद्

मनीष सिंह निराला said...

बेहतरीन प्रस्तुति !
इस रचना से हिंदी के प्रति आपका अटूट प्रेम झलकता है !हिंदी एवं हिंदुस्तान यूँ अग्रसर रहे !
आभार !

S.N SHUKLA said...

Anam mitra,
Manish singh nirala ji,

आभार आपके स्नेहमयी समर्थन का.

संजय भास्कर said...

हिंदी भाषा को बहुत खूबसूरती से परिभाषित करती रचना |

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