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Wednesday, August 1, 2012

(160) बशर नाकामियों को जब मुकद्दर मान लेता है

जो मेहनत और हिकमत को ,  इबादत मान लेता है  /
उसे मिलता है वह सब कुछ , जो चाहत ठान लेता है  /

तवंगर  भी  कदमबोशी  को  तब  मज़बूर  होता  है  ,
वो फाकेमस्त ! जिस दम अपनी ताकत जान लेता है /

बदल जाती हैं हाथों  की  लकीरें , और  किश्मत भी ,
बशर जब जीतने की जिद , को मन में ठान लेता है /

मचलता दिल , मगर फिर भी वो बच्चा जिद नहीं करता ,
जो  अपने  बाप  की ,  माली  हकीकत  जान  लेता  है  /

ठहर जाती हैं सारी सलवटें मौजों की बस उस दम ,
समंदर जिस समय , सोने को चादर तान लेता है  /

खुदा भी चाहकर , उसके लिए कुछ कर नहीं सकता ,
बशर  नाकामियों  को  जब  मुकद्दर  मान  लेता  है  /

                                  - एस. एन. शुक्ल 

31 comments:

कुमार said...

खुदा भी चाहकर , उसके लिए कुछ कर नहीं सकता ,
बशर नाकामियों को जब मुकद्दर मान लेता है/

वाह शुक्ला जी , बहुत ही लाजवाब रचना,
हर पंक्ति में एक गहन अर्थ समाया है... बहुत सुन्दर

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मचलता दिल , मगर फिर भी वो बच्चा जिद नहीं करता ,
जो अपने बाप की , माली हकीकत जान लेता है /


बहुत खूब ... बढ़िया गज़ल

dheerendra said...

खुदा भी चाहकर ,उसके लिए कुछ कर नहीं सकता ,
बशर नाकामियों को जब मुकद्दर मान लेता है,,,
उत्कृष्ट लाजबाब प्रस्तुति,,,,,,

रक्षाबँधन की हार्दिक बधाई,शुभकामनाए,,,
RECENT POST काव्यान्जलि ...: रक्षा का बंधन,,,,

expression said...

बहुत बढ़िया सर....
सुन्दर प्रस्तुति...

सादर
अनु

RISHAV-VERMA......... said...

Badal jati hain hatho ki lakeeren
Basar jab jeetne ki thaan leta hai...BAHOOT KHUB kaha .Olympics mai aap top 3 positions k competition k mai unke chehre pe dikh jati hai kisne jyada jeetne ki thaani hai...

Ramakant Singh said...

आपने सही कहा ...जिंदगी के लम्हों को जीने का खुबसूरत अंदाज़

Sunil Kumar said...

बहुत खुबसूरत ग़ज़ल दाद तो कुबूल करनी ही होगी ..

प्रवीण पाण्डेय said...

अपने पर विश्वास कहाँ से खो दें..

lokendra singh said...

इच्छाशक्ति की ताकत ही सबसे बड़ी ताकत है... बेहतरीन रचना

Maheshwari kaneri said...

बदल जाती हैं हाथों की लकीरें , और किश्मत भी ,
बशर जब जीतने की जिद , को मन में ठान लेता है /
वाह: बहुत सुन्दर गजल..

Anjani Kumar said...

बेहतरीन ग़ज़ल ...
एक एक शेर एक एक सत्य को बयां करता हुआ

Anonymous said...

शुक्लजी,
आपकी टिपण्णी पढ़ी थी ! ब्लॉग-मित्रता के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ ! आपके द्वार पर आ तो गया हूँ, लेकिन आप्यें थोड़ा अवकाश लेकर पढूंगा और तब अपना मंतव्य भेजूंगा !!
सप्रीत--आ.व्.ओझा.

आनन्द वर्धन ओझा said...

शुक्लजी,
आपकी टिपण्णी पढ़ी थी ! ब्लॉग-मित्रता के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ ! आपके द्वार पर आ तो गया हूँ, लेकिन आप्यें थोड़ा अवकाश लेकर पढूंगा और तब अपना मंतव्य भेजूंगा !!
सप्रीत--आ.व्.ओझा.

Sniel Shekhar said...

Oh my god.. dont have words to say.. Awesome lines.. I actualy wait for your blog to see if there is something new... keep writing... I loved this one.

रचना दीक्षित said...

बहुत सुंदर जज़्बात इस खूबसूरत गज़ल द्वारा.

बहुत.

S.N SHUKLA said...

Kumar ji,
Sangita ji,
Dheerendra ji,

आप मित्रों से इसी स्नेह की अपेक्षा रही है .

S.N SHUKLA said...

Anu ji,
Ramakant ji,
Sunil ji,

आभार आपके स्नेह और समर्थन का .

S.N SHUKLA said...

Rishav Verma ji,

आपके ब्लॉग पर आगमन और स्नेह का आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

Pravin pandey ji,
Lokendra Singh ji,
Maheshwari kaneri ji,
आपकी शुभकामनाओं का आभारी हूँ .

S.N SHUKLA said...

Anjani kumar ji,
Rachana Dixit ji,

आभार इस स्नेह का .

S.N SHUKLA said...

A. B. Ojha ji,
Sniel Shekhar ji,

ब्लॉग पर आगमन और शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ .

अल्पना वर्मा said...

खुदा भी चाहकर ,उसके लिए कुछ कर नहीं सकता ,
बशर नाकामियों को जब मुकद्दर मान लेता है,,,

वाह!बहुत ही उम्दा शेर कहा है!
ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी.

India Darpan said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

Shanti Garg said...

बहुत ही बेहतरीन और प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... लाजवाब शेर हैं सभी इस गज़ल के ...
गहरा मर्म लिए ... बधाई ...

S.N SHUKLA said...

Alpana verma ji,
India Darpan ji,
आपका स्नेह मिला , बहुत- बहुत आभार.

S.N SHUKLA said...

Shanti Garg ji,
Digamber Naswa ji,

आपकी स्नेहिल शुभकामनाओं का आभारी हूँ.

RISHAV-VERMA......... said...

Sir,aabhari toh mai khuda ka hu ki aapko padhne ka mujhe mauka diya
:)

RISHAV-VERMA......... said...

Sir,aabhari toh mai khuda ka hu ki aapko padhne ka mujhe mauka diya
:)

S.N SHUKLA said...

Rishav verma ji,

यह स्नेह निरंतर मिलता रहे, यही आकांक्षा है.

Madan Mohan Saxena said...

खुदा भी चाहकर , उसके लिए कुछ कर नहीं सकता ,
बशर नाकामियों को जब मुकद्दर मान लेता है/
बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/