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Saturday, December 10, 2011

(125) ऐसा कभी खुदा न करे

तुझे  भुलाऊँ मैं , ऐसा कभी खुदा न करे /
मेरे ख़याल से सूरत तेरी  जुदा  न  करे  /

इश्क  की राह , समंदर से  बड़ी  होती है  ,
निभा सके न जिसे , ऐसा वायदा न करे /

मरीज़ मुझको, तुझे लोग  दवा  कहते हैं ,
दवा, दवा ही नहीं , जो कि फ़ायदा न करे /


इश्क की आग की , कैसे वो तपिश समझेगा ,
जिसके महबूब को , कोई कभी जुदा न करे  /

अब तो ये ज़ख्म , ये नासूर ही ज़न्नत हैं मेरी ,
मेहरबाँ  होके  इन्हें , कोई  अलहदा  न  करे  /

25 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

दवा मन के रोगों को हर ले, पर असर तो करे।

vidya said...

बहुत खूबसूरत गज़ल..
दाद हाज़िर है.

poonam said...

khuda kare kabuk apki dua...

ASHOK BIRLA said...

तुझे भुलाऊँ मैं , ऐसा कभी खुदा न करे
मेरे ख़याल से सूरत तेरी जुदा न करे
is rachna ki tarif karne ke liye mere pass sabdon ki kami hai ....hriday ki paridi ko chute huye pida mya ho gay hai sama

अमरनाथ 'मधुर' said...

'दवा दवा ही नहीं जो कि फायदा न करे' सुन्दर भावाभिव्यक्ति ..| बधाई |

Prabodh Kumar Govil said...

nasoor kaha...zannat leli.darshan bhi kiye ...mannat leli. bahut khoob.

mahendra verma said...

बहुत सुंदर ..

हर शेर में गहरी बातें।

वन्दना said...

अब तो ये ज़ख्म , ये नासूर ही ज़न्नत हैं मेरी ,
मेहरबाँ होके इन्हें , कोई अलहदा न करे /बहुत ही शानदार गज़ल्।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

दवा, दवा ही नहीं जो कि फायदा न करे.
वाह शुक्ला जी , क्या बात है. हर शेर लावजाब.

NISHA MAHARANA said...

very nice.

S.N SHUKLA said...

PRAVIN PANDEY JI,
VIDYA JI,
POONAM JI,

आप शुभचिंतकों के ब्लॉग पर आगमन और समर्थन का आभार, धन्यवाद.

S.N SHUKLA said...

ASHOK BIRLA JI,
AMARNATH MADHUR JI
आपके ब्लॉग पर आगमन और स्नेहानुकम्पा का ह्रदय से आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

PRABODH KUMAR GOVIL JI,
MAHENDRA VERMA JI,
VANDANA JI,
आपके स्नेह की वर्षा से अभिभूत हूँ, हमेशा प्रतीक्षा रहेगी इस स्नेह की.

S.N SHUKLA said...

ARUN NIGAM JI,
NISHA MAHARANA,

इसी स्नेह की सदैव प्रतीक्षा रहेगी.

Anita said...

इश्क की आग की , कैसे वो तपिश समझेगा ,
जिसके महबूब को , कोई कभी जुदा न करे /
विरह से ही प्रेम बढ़ता है... बहुत प्रभावशाली गजल !

Reena Maurya said...

bahut hi accha
lajavab..

chetankavi said...

शुक्ल जी
आपके रचना संसार में विवध रचनायें, विविध भाव हैं!
कभी देश तो कभी विरह की पीड़ा, समाज के हर एक घटनाक्रम,
मानव के हर एक एहसास पर आप लिखते हैं! आपका बहुत बहुत धन्यवाद,
जो मैं आपका सानिध्य पा सका! नमन आपको!

Vikrant Srivastava said...

बहुत ही शानदार गज़ल्।

Vikrant Srivastava said...

really too good. just posted on my FB profile with your reference...
thanks

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

इश्क की राह समंदर से बड़ी होती है ,
निभा सके न जिसे ऐसा वायदा न करे !
वाह! बहुत ही खूबसूरत शेर कहा है !
मुबारक हो !

दिगम्बर नासवा said...

इश्क की राह , समंदर से बड़ी होती है ,
निभा सके न जिसे , ऐसा वायदा न करे ...

बहुत लाजवाब शेर ... इश्क की राह कठिन और गहरी होती है ... कमाल की गज़ल है शुक्ल जी ...

Rakesh Kumar said...

शुक्ला जी बहुत ही कमाल का लिखतें हैं आप.
आपकी प्रस्तुति की तारीफ़ के लिए शब्द नही मेरे पास.

समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा जी.

S.N SHUKLA said...

Anita ji,
Reena Maurya ji,
Chetan ji,
aapakee prashansaa aur shubhakaamanaaon kaa aabhaaree hoon, aapakaa baar- baar swaagat hai mere blog par.

S.N SHUKLA said...

Vikrant srivastav ji,
Gyanchand Marmagya ji,
aapane saraahaa, rachanaa saarthak huyee, aabhaar.

S.N SHUKLA said...

Digambar Naswa ji,
Rakesh kumar ji,
aapakaa snehaasheesh mila aabhaaree hoon.