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Monday, September 12, 2011

(99 ) वर्षों तक

उम्र भर साथ निभाने का था वादा कोई ,
 उसी करार में हम, जीते रहे वर्षों  तक /

तल्ख़ झोंको से लरजती हुयी चादर अपनी ,
सहेजते   भी  रहे ,  सीते रहे   वर्षों तक  /

सामने लोग मेरे , मुझसे खुद को भरते रहे ,
और  हम बहते रहे , रीते रहे   वर्षों  तक  / 

 फब्तियों  का  भी , एक दौर सहा है मैंने  ,
 ज़हर के घूँट भी , हम पीते रहे वर्षों तक /

 वे जो अकल में थे , पासंग भर नहीं मेरे-
 कभी उनसे भी , गए-बीते  रहे  वर्षों तक / 

 वक्त जो कुछ न कराये , वो समझो थोड़ा है,
  ये मान, सहते रहे , जीते  रहे वर्षों तक  /














22 comments:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

ईमानदार अभिव्यक्ति!!

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत सच कहा आपने, ऐसा ही होता है जीवन में।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

पाठक तक तपिश पहुंचाने में सक्षम कुछ तीखे अनुभव समेटे बेलाग सत्य... सादर..

Sunil Kumar said...

शुक्ल जी, ग़ज़ल का मतला गजब का है और हर शेर खुबसूरत वाह वाह .......

Dr (Miss) Sharad Singh said...

उम्र भर साथ निभाने का था वादा कोई ,
उसी करार में हम, जीते रहे वर्षों तक....

संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता...

रविकर said...

सामने लोग मेरे , मुझसे खुद को भरते रहे ,और हम बहते रहे , रीते रहे वर्षों तक ||

सुन्दर रचना आपकी, नए नए आयाम |
देत बधाई प्रेम से, हो प्रस्तुति-अविराम ||

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

S.N SHUKLA said...

Lalit verma ji,
pravee pandey ji,
S. M. Habeeb ji
आपका स्नेह और समर्थन मेरा मार्गदर्शक भी है और संबल भी , सकारात्मक टिप्पणी का आभारी हूँ .

S.N SHUKLA said...

Suneel kumar ji,
Dr. Sharad ji,
Ravikar ji
समर्थन और सकारात्मक टिप्पणी का
बहुत आभारी हूँ , धन्यवाद

S.N SHUKLA said...

Dr. Roopchandra Shastri ji


शास्त्री जी आपने मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान दिया , बहुत आभारी हूँ , धन्यवाद

डा० व्योम said...

शुक्ल जी एक अच्छी गज़ल के लिये वधाई। उससे भी अधिक वधाई आपको इसलिए भी कि आप औरों की कविताएँ पढ़ते रहते हैं और उनपर सकारात्मक टिप्पणी भी लिखते हैं, यह बहुत बड़ी बात है। पुनः पुनः वधाई आपको।

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर और सहज भावो की लाजवाब अभिव्यक्ति...आभार

आशा said...

बहुत सच्ची बात |बधाई
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार |
आशा

डॉ. जेन्नी शबनम said...

sabhi sher bahut umda aur saraahniye. daad sweekaaren.

veerubhai said...

.गहरे एहसासात की रचना .खुद से साक्षात्कार कराती प्रेरक घटना .तादात्म्य तदानुभूति करवा गई आपके यह रचना ,लिखा आपने सह -भावी ,सह -भोक्ता हम भी थे .http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

अमरनाथ 'मधुर' said...

बहुत सुन्दर गजल है| बधाई |

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

ज़िंदगी की हक़ीकत को गज़ल में ढाला है.
शुक्ला जी आपका अंदाज़ ही निराला है.

दिगम्बर नासवा said...

सक्स्च है कभी वक्त पलटना नहीं चाहिए ... नहीं तो क्या से क्या करवा देता है ... अनुभव के आधार पर लिखी स्पष्ट रचना ..

Acupressureindia said...

बहुत सुन्दर

S.N SHUKLA said...

vyom ji,
Maheshwari kaneri ji,
Asha ji
आपके समर्थन और सकारात्मक टिप्पणी का आभारी हूँ /

S.N SHUKLA said...

Jenni Shabnam ji,
Veeru bhai,
Amarnath Madhur ji
समर्थन और सकारात्मक टिप्पणी का
बहुत- बहुत आभार, धन्यवाद.

S.N SHUKLA said...

Arun kumar nigam ji,
Digambar Naswa ji,


रचना की प्रशंसा के लिए बहुत- बहुत आभार, धन्यवाद.