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Saturday, August 27, 2011

(96) उजाड़ की तरह

कल के उजाड़, आज हैं बहार की तरह
और हम उजाड़ से अधिक उजाड़ की तरह.

वो सिर उठाये, आलीशान ताजमहल हैं.
हम हैं उखड चुकी, किसी मजार की तरह.

वो शीश महल में सजे, फैशन की ज्यों दुकान,
हम हैं किसी उजड़ी हुई बाज़ार की तरह.

वो पालकी में बैठे किसी राजकुंवर से,
हम पालकी लिए हुए कहार की तरह.

मसनद पे जमे हैं, वो किसी साहूकार से,
राशन दुकान वाली, हम कतार की तरह.

उनके-हमारे बीच में अंतर बहुत बड़ा ,
चाबी खजाने की वो, हम उधार की तरह.

19 comments:

virendra said...

बहुत सशक्त रचना सार्थक और खूबसूरत प्रस्तुति .

virendra said...

बहुत सशक्त रचना सार्थक और खूबसूरत प्रस्तुति .

प्रवीण पाण्डेय said...

बेहतरीन पंक्तियाँ, वाह।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वो पालकी में बैठे किसी राजकुंवर से,
हम पालकी लिए हुए कहार की तरह.

वाह.... बहुत सुन्दर रचना....
सादर बधाई...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया गज़ल ...

देवेश प्रताप said...

वो शीश महल में सजे, फैशन की ज्यों दुकान,हम हैं किसी उजड़ी हुई बाज़ार की तरह.

बहुत खूब ..

mahendra verma said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल,
वे और हम की बेहतरीन तुलना।

दिगम्बर नासवा said...

वो पालकी में बैठे किसी राजकुंवर से,
हम पालकी लिए हुए कहार की तरह ...

बहुत खूब ... लाजवाब शेर है .. आज के नेताओं पर सही उतरता है .. चुनने के बाड़ ऐसा बर्ताव ही करते हैं वो ...

Dr (Miss) Sharad Singh said...

वो पालकी में बैठे किसी राजकुंवर से,
हम पालकी लिए हुए कहार की तरह.

ग़ज़ल का हर शेर खूबसूरत है मगर इस शेर के लिए आपकी लेखनी को नमन...

Ankit pandey said...

बहुत सुन्दर..! दिल को छू गई हर एक पंक्तियाँ!शुभकामनाएं.

S.N SHUKLA said...

priy Virendra ji
Pravin Pandey ji
S.M. Habeeb ji
ब्लॉग पर आगमन और स्नेह- समर्थन प्रदान करने का आभारी हूँ,

S.N SHUKLA said...

Sangita ji,
Devesh Pratap ji,
Mahendra Verma ji
स्नेह- समर्थन प्रदान करने का आभारी हूँ, धन्यवाद

S.N SHUKLA said...

Digamber Naswa ji,
Dr. Sharad ji,
Ankit ji
ब्लॉग पर आगमन और समर्थन प्रदान करने का आभारी हूँ, धन्यवाद

ZEAL said...

वो पालकी में बैठे किसी राजकुंवर से,
हम पालकी लिए हुए कहार की तरह.....

Very touching lines...

.

Sunil Kumar said...

वाह.... बहुत सुन्दर रचना....
सादर बधाई...

नीरज गोस्वामी said...

हम पालकी लिए हुए कहार की तरह...वाह...बेमिसाल रचना...

नीरज

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

'चाबी खजाने की वो , हम उधार की तरह '

यथार्थपरक , उम्दा ग़ज़ल ....हर शेर अर्थपूर्ण

S.N SHUKLA said...

ZEAL JI,
Sunil Kumar ji,
Neeraj Goswami ji,
Surendra Singh ji
उत्साहवर्धन , सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ , धन्यवाद

अनुपमा पाठक said...

सार्थक अभिव्यक्ति!!