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Thursday, March 22, 2012

(144) निभाता रहा हूँ मैं /

हंसकर हर एक गम को भुलाता रहा हूँ मैं  /
ऐ  ज़िंदगी ! तुझे  यूँ   निभाता  रहा हूँ  मैं  /

औरों को न हो मेरे किसी दर्द का एहसास ,
यह सोच , अपने ज़ख्म छुपाता रहा हूँ मैं  /

खुशियाँ भी बाटने में हिचकते हैं जबकि लोग,
तब  दर्द   दूसरों   का  ,  बटाता  रहा  हूँ  मैं  /

लोगों को गिले हैं , कि मैंने कुछ नहीं किया ,
कन्धों पे  हिमाला को , उठाता  रहा हूँ  मैं  /

खुशियों के पल भले ही कम हों , उनको याद कर ,
अपना  हर  एक  दर्द  ,  भुलाता  रहा हूँ  मैं  /

खंजर  मेरे सीने  में , धँसे  हैं अज़ीज़  के ,
जब दुश्मनों से खुद को, बचाता रहा हूँ मैं /

अनजाने दे सका न कोई एक भी खरोच ,
साँपों को खुद ही दूध पिलाता रहा हूँ मैं  /

                                - एस. एन. शुक्ल 

 

31 comments:

रविकर said...

बहुत खूब शुक्ल जी |
बढ़िया प्रस्तुति |
बधाई ||

Madhuresh said...

achhi rachna hai

शालिनी कौशिक said...

bahut sundar bhavabhivyakti.badhai.हे!माँ मेरे जिले के नेता को सी .एम् .बना दो.

expression said...

वाह!!
बेहतरीन गज़ल.....
बेहतरीन ख़याल....

सादर.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत गजल

रविकर said...

नवसंवत्सर की शुभकामनायें ।।

Dr.NISHA MAHARANA said...

दिल के भावों को बडी खूबसूरती से पिरोया है।बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Karuna Saxena said...

बहुत खूब......खूबसूरत प्रस्तुति, शुभकामनायें..

प्रवीण पाण्डेय said...

भावों की सशक्त अभिव्यक्ति, दमदार..

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

बेहतरीन गज़ल, हर शेर पर दाद कबूल करें........

Amrita Tanmay said...

अति सुन्दर रचना.

S.N SHUKLA said...

RAVIKAR JI,
Madhuresh ji,
Shalini ji,
aabhaar aapakee pratikriyaa ke लिए.

S.N SHUKLA said...

Exepression ji,

आभारी हूँ आपके इस स्नेह का.

S.N SHUKLA said...

Sangita ji,
Nisha Maharana ji,
Karuna Saxena ji,

आपका स्नेह और समर्थन पाकर सार्थक हुयी रचना.

S.N SHUKLA said...

Pravin pandey ji,
Arun Nigam ji,
शुभकामनाओं का आभारी हूँ.

भावना said...

HAR EK PANKTI ASAR KAR RAHI THI ...ANUBHAV SE HI SAHBDON ME SAJEEVATA AATI HAI ..SHAYAD!!!

sangita said...

सार्थक एवम बेहतरीन रचना । बधाई स्वीकार करें।

इमरान अंसारी said...

बहुत ही खूब साहब....आखिरी शेर तो बहुत ही उम्दा ।

सदा said...

वाह ...बहुत खूब ।

shalini said...

bahut khoob shukl ji!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत ही लाजवाब ... हर शेर कमाल का है शुक्ल जी ... क्या बात है ...

lokendra singh rajput said...

सार्थक जीवन और सार्थक कविता।

Saras said...

अपनों के दिए ज़ख्म सबसे गहरे होते हैं...जो रिश्ते रहते हैं हरदम ...नासर बनकर ...छूती हुई ग़ज़ल ...!

Maheshwari kaneri said...

सार्थक एवम बेहतरीन रचना । बढ़िया प्रस्तुति पर
बधाई ||

S.N SHUKLA said...

Bhavana ji,
Sangita ji,

ब्लॉग पर आगमन का स्वागत और समर्थन का आभार.

S.N SHUKLA said...

Imaran ji,
Sada ji,
Shalini ji,

आप मित्रों से इसी स्नेह की अपेक्षा रही है.

S.N SHUKLA said...

Digambar Naswa ji,
Lokendra Singh ji,

आपकी शुभकामनाओं का कृतज्ञ हूँ.

S.N SHUKLA said...

Saras ji,

समर्थन का ह्रदय से आभारी हूँ.

Aniruddha Mishra said...

वाह वाह ! बहुत खूब शुक्ल जी !
आपका ब्लाॅग देखने के बाद, पढ़ने के बाद बड़ा ही आनंदित हो उठा मन।
इसके लिये आप बधाई के पात्र हैं,
आपसे अनुरोध है कि लगातार हम जैसे तमाम पाठकों के लिये ऐसे ही लिखते रहें।
धन्यवाद !!

आईने में said...

वाह! अभी इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता .

S.N SHUKLA said...

Aniruddha Misra ji,
AINA JI,

आभारी हूँ आपकी इन शुभकामनाओं का .