कौन करता है इबादत , सब तिजारत कर रहे ,
ख्वाहिशें पसरी हुई हैं , हर इबादतगाह में।
भीड़ से ज्यादा कहीं अब , मन्नतों की भीड़ है,
चर्च, गुरुद्वारों, शिवालों, मस्जिद-ओ-दरगाह में।
कितनी खुदगर्जी , कि सौदेबाजी भी भगवान से,
भीख देते , रहमतें हैं देखते अल्लाह में।
मजहबों के रहनुमा , धर्मोपदेशक , पादरी ,
सबके सब बगुला भगत, दौलत है सबकी चाह में।
धर्म भी धंधा हुआ , सब कुछ बिकाऊ है यहाँ ,
चलना मुश्किल हो रहा, पगडंडियों की राह में।
बेअकल , बेभाव बिकते रोज इस बाज़ार में ,
फिर भी कितनी भीड़, हर दूकां पे ख्वाहम-ख्वाह में।
- एस .एन .शुक्ल
ख्वाहिशें पसरी हुई हैं , हर इबादतगाह में।
भीड़ से ज्यादा कहीं अब , मन्नतों की भीड़ है,
चर्च, गुरुद्वारों, शिवालों, मस्जिद-ओ-दरगाह में।
कितनी खुदगर्जी , कि सौदेबाजी भी भगवान से,
भीख देते , रहमतें हैं देखते अल्लाह में।
मजहबों के रहनुमा , धर्मोपदेशक , पादरी ,
सबके सब बगुला भगत, दौलत है सबकी चाह में।
धर्म भी धंधा हुआ , सब कुछ बिकाऊ है यहाँ ,
चलना मुश्किल हो रहा, पगडंडियों की राह में।
बेअकल , बेभाव बिकते रोज इस बाज़ार में ,
फिर भी कितनी भीड़, हर दूकां पे ख्वाहम-ख्वाह में।
- एस .एन .शुक्ल









