रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
खुशी से अंग हर प्रत्यंग भर दे /
उमंगों के बाहें निर्झर धरा पर ,
आज तू तर- बतर हर अंग कर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
रंगों का अर्थ ही होता है खुशियाँ ,
रंगों के मध्य ही बसती हैं खुशियाँ ,
ये खुशियाँ जायँ बन सच्चाइयाँ अब ,
तू अपने रंग में वह रंग भर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
बजाती तू मिलन का साज होली ,
तू है, पर्वों के सिर का ताज होली ,
दूरियाँ जायँ मिट मानव मनों की ,
तू कुछ इस बार ऐसा ढंग कर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
तू आती और बस जाती चली है ,
खिलाती प्रेम की आकर कली है ,
ठहर जा , आके तू इस बार शुभगे ,
होलिके ! रूढ़ियों को भंग कर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
- एस. एन. शुक्ल
खुशी से अंग हर प्रत्यंग भर दे /
उमंगों के बाहें निर्झर धरा पर ,
आज तू तर- बतर हर अंग कर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
रंगों का अर्थ ही होता है खुशियाँ ,
रंगों के मध्य ही बसती हैं खुशियाँ ,
ये खुशियाँ जायँ बन सच्चाइयाँ अब ,
तू अपने रंग में वह रंग भर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
बजाती तू मिलन का साज होली ,
तू है, पर्वों के सिर का ताज होली ,
दूरियाँ जायँ मिट मानव मनों की ,
तू कुछ इस बार ऐसा ढंग कर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
तू आती और बस जाती चली है ,
खिलाती प्रेम की आकर कली है ,
ठहर जा , आके तू इस बार शुभगे ,
होलिके ! रूढ़ियों को भंग कर दे /
रंगों के पर्व रंगारंग कर दे /
- एस. एन. शुक्ल













