फिर से बदलाव का एक दौर चलाया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
चाँद - तारों पे पहुँचने लगा इन्सान मगर ,
आसमानों में भी उड़ने लगा इन्सान मगर ,
यार मतलब के सभी , झूठ के रिश्ते - नाते ,
भूलता जा रहा , इन्सान को इन्सान मगर ,
फिर से इन्सानियत का पाठ पढ़ाया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
पहले मुश्किल थी जिन्दगी , बहुत ही किल्लत थी ,
पहले रस्ते न थे , दूरी थी , मगर मिल्लत थी ,
पहले गम और खुशी , गैर की भी , अपनी थी ,
जिन्दगी तल्ख़ भले थी , मगर- न ज़िल्लत थी ,
आज के दौर ! किसे अपना बताया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
लूट हर ओर मची है , नीयत में खामी है,
आम इन्सान की किस्मत में ही नाकामी है,
अक्लमंदों को यहाँ ,खुश्क रोटियाँ मुश्किल ,
हरामखोर ! बड़े हैं , बड़ा हरामी है ,
हर गुनहगार को औकात में लाया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
चाँद - तारों पे पहुँचने लगा इन्सान मगर ,
आसमानों में भी उड़ने लगा इन्सान मगर ,
यार मतलब के सभी , झूठ के रिश्ते - नाते ,
भूलता जा रहा , इन्सान को इन्सान मगर ,
फिर से इन्सानियत का पाठ पढ़ाया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
पहले मुश्किल थी जिन्दगी , बहुत ही किल्लत थी ,
पहले रस्ते न थे , दूरी थी , मगर मिल्लत थी ,
पहले गम और खुशी , गैर की भी , अपनी थी ,
जिन्दगी तल्ख़ भले थी , मगर- न ज़िल्लत थी ,
आज के दौर ! किसे अपना बताया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
लूट हर ओर मची है , नीयत में खामी है,
आम इन्सान की किस्मत में ही नाकामी है,
अक्लमंदों को यहाँ ,खुश्क रोटियाँ मुश्किल ,
हरामखोर ! बड़े हैं , बड़ा हरामी है ,
हर गुनहगार को औकात में लाया जाए /
पहले इन्सान को इन्सान बनाया जाए /
- S. N. Shukla




















