जाति- धर्म से ऊपर उठकर, प्रतिभा का सम्मान प्रथम हो /
आओ ! मातृभूमि की सेवा का , मिलकर संकल्प करें हम ,
अपनी भाषा- भूषा के प्रति , फिर आदर का भाव भरें हम ,
उत्कर्शों के शिखर चढ़ें पर, संस्कृति का उत्थान प्रथम हो /
तब होगा निर्माण राष्ट्र का ,जब चरित्र निर्माण प्रथम हो /
पराधीनता के बंधन से , मुक्त हुए छह दशक हो गए ,
पर गाँधी, सुभाष के सपने , स्वार्थ सिन्धु के बीच खो गए ,
उन सपनों को सच करने का , घर- घर में अभियान प्रथम हो /
तब होगा निर्माण राष्ट्र का, जब चरित्र निर्माण प्रथम हो /
लोकतंत्र के सोपानों पर, वर्ग - वर्ण जैसी सीमाएं ,
बाधाओं के अग्निकुंड में, अब भी जलती हैं प्रतिभाएं ,
आवाहन तब करें देश का, जन- जन का आह्वान प्रथम हो /
तब होगा निर्माण राष्ट्र का, जब चरित्र निर्माण प्रथम हो /
स्वार्थ साधना में जनमानस , संवेदना भुला बैठा है ,
निज प्रभुता के मद से गर्वित , मनुज स्वयम में ही ऐंठा है,
चढ़ें प्रगति सोपान स्वयम, पर औरों का भी ध्यान प्रथम हो /
तब होगा निर्माण राष्ट्र का, जब चरित्र निर्माण प्रथम हो /



































