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Thursday, April 19, 2012

(150) निभा लेते हैं /

दिल के जख्मों को तबस्सुम से छुपा लेते हैं  /
ज़िंदगी  जीते  हैं  ,  कैसे  भी  निभा  लेते  हैं /

टूटते  ख़्वाब  ,  तो  होता है  दर्द  हमको  भी  ,
हम तो किरचों को भी , पलकों पे उठा लेते हैं /

हम मगर वो भी नहीं , हाँ में हाँ मिलाते रहें ,
हर एक दर पे , जो सिर अपना झुका लेते हैं  /

तपिश के  डर  से , छाँव खोजते होंगे कोई ,
हम तपिश हो भी तो , शोलों को हवा देते हैं /

सरे - कोहसार  से ,  लाते उतार हैं  दरिया  , 
ठान लें गर ,  तो समंदर को सुखा देते  हैं  /

लोग डरते हैं , हवाओं के जोर से ,  पर हम 
आँधियाँ  आयें तो ,  दीवार गिरा  देते  हैं  /

                              - एस. एन. शुक्ल

 

55 comments:

dheerendra said...

टूटते ख़्वाब,तो होता है दर्द हमको भी,
हम तो किरचों को भी,पलकों पे उठा लेते हैं
वाह!!!!बहुत बढ़िया सुंदर प्रस्तुति,शुक्ल जी

मै आपका नियमित पाठक हूँ,हमेशा पोस्ट पर आने के लिए आमंत्रित करता हूँ,किन्तु आप नही आते,..आइये स्वागत है,...

MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

Vaanbhatt said...

मै तो इखलाक के हांथों ही बिका करता हूँ...
और होंगे तेरे बाज़ार में बिकने वाले...

lokendra singh rajput said...

बेहतरीन... आनंद आ गया...

sumukh bansal said...

awesome post sir..

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Bahut Umda Panktiyan....

रविकर फैजाबादी said...

सुन्दर प्रस्तुति |
आभार ||

शुभकामनाये ||

प्रवीण पाण्डेय said...

ऐसे ही जीना भाता है,
कहे वही जो सह पाता है।

नीरज गोस्वामी said...

सुभान अल्लाह...एक एक शेर तराशा हुआ नगीना है...दाद पहुंचाएं

नीरज

mridula pradhan said...

jabab nahin.....kai baar padhi.....

Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) said...

waah...bahut khoob!!

यशवन्त माथुर said...

बहुत अच्छी गजल है सर!
150 पोस्ट होने की हार्दिक बधाई!


सादर

विष्णु बैरागी said...

आपके आदेशानुसार मैं हाजिर हूँ। मुझे साहित्‍य की समझ नहीं है, इसलिए कोई सलाह देने का दुस्‍साहस नहीं करता। हॉं, कविता अच्‍छी लगी या नहीं, यह अनुभूति के स्‍तर पर कह देता हूँ।

सबसे पहले तो 150 पोस्‍टों की बधाइयॉं स्‍वीकार करें। आपकी यह गजल मुझे अच्‍छी लगी - व्‍यवस्‍था के विरुध्‍द और धारा के प्रतिकूल कही हर बात मन को भाती है।

मेरा तकनीकी ज्ञान शून्‍य है इसलिए वे ही ब्‍लॉग पढ पा रहा हूँ जो मैं इ-मेल से प्राप्‍त कर पाता हूँ। यदि आपका ब्‍लॉग भी ई-मेल से प्राप्‍त किया जा सकता है तो कृपया तदनुसार सूचित कीजिएगा। मैं आपकी रचनाऍं पढना चाहूँगा।

सदा said...

वाह ...बहुत खूब ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आदरणीय शुक्ल जी!
आपने बहुत उम्दा ग़ज़ल लिखी है।
150वीं पोस्ट की शुभकामनाएँ स्वीकार करें।

DR. ANWER JAMAL said...

Nice poem.

Mubarak ho.

इमरान अंसारी said...

वाह बहुत ही खुबसूरत आखिरी शेर तो कमाल का है ।

sangita said...

सुन्दर प्रस्तुति है ।
मै तो इखलाक के हांथों ही बिका करता हूँ...
और होंगे तेरे बाज़ार में बिकने वाले...

Anita said...

बहुत खूबसूरत गजल...ऐसा ही जज्बा जीवन को ऊचाईयों पर ले जाता है. आपको बहुत बहुत बधाई अब तक के सफर के लिये.

सतीश सक्सेना said...

@ दिल के जख्मों को तवस्सुम से छिपा लेते हैं ..
ऐसे शब्द तो एक बेहतरीन दिल का इंसान ही लिख पायेगा ...
आप बेहतर इंसान है शुक्ला जी !

सतीश सक्सेना said...


आपकी १५० वीं रचना का एक एक शेर संग्रह करने लायक है , मगर कंजूसी की हद यह कि दोस्तों को ले जाने भी नहीं देते !
बधाई इस खूबसूरत रचना के लिए !

कुमार said...

बहुत ही सुन्दर रचना...१५०वीं पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई!!

मेरी नई पोस्ट पर पधारें मेहनत के नशे में आप सिगरेट से सिगार हो गये

Rewa said...

wah.... bahut khoob..

Naveen Mani Tripathi said...

150 rachana poori hone pr hardik badhai ....

behad khoobsoorat rachana pr hardik badhai Shukl ji.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

टूटते ख़्वाब,तो होता है दर्द हमको भी,
हम तो किरचों को भी पलकों पे उठा लेते हैं
बहुत बढ़िया सुंदर प्रस्तुति.........
प्रिय शुक्ल जी मुबारक हो आप के शतक से भी आगे डेढ़ शतक क्या बात है ...मुबारक हो बधाइयाँ ...साहित्य सृजन में बिभिन्न विषयों और समाज के उत्थान में आँखें खोलने वाली कवितायेँ और आप के लेख प्य्रारे रहे और बहुत ही उपयोगी ...बहुत बहुत शुभ कामनाएं आप उत्तरोत्तर यों ही प्रगति कर रौशनी फैलाते रहें और अपना स्नेह हम सब पर भी बनाये रखें ..
आइये एक बनें नेक बने --जय श्री राधे
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय शुक्ल जी मुबारक हो आप के शतक से भी आगे डेढ़ शतक क्या बात है ...मुबारक हो बधाइयाँ ...साहित्य सृजन में बिभिन्न विषयों और समाज के उत्थान में आँखें खोलने वाली कवितायेँ और आप के लेख प्य्रारे रहे और बहुत ही उपयोगी ...बहुत बहुत शुभ कामनाएं आप उत्तरोत्तर यों ही प्रगति कर रौशनी फैलाते रहें और अपना स्नेह हम सब पर भी बनाये रखें ..
आइये एक बनें नेक बने --जय श्री राधे
भ्रमर ५

S.N SHUKLA said...

DHEERENDRA JI,
Vanbhatt ji,
Lokendra Singh ji,
आपके इस स्नेह का ह्रदय से आभार.

S.N SHUKLA said...

Sumukh ji,
Monika ji,
Ravikar ji,

आपकी स्नेहिल शुभकामनाओं का कृतज्ञ हूँ.

S.N SHUKLA said...

Pravin Pandey ji,
Neeraj Goswami ji,
Mridula Pradhan ji,

स्नेह मिला, आभारी हूँ.

S.N SHUKLA said...

Brijendra Singh ji,
Yashwant Mathur ji,

यह स्नेह सदैव इसी तरह मिलता रहे, यही आकांक्षा है.

S.N SHUKLA said...

Vishnu Vairagi ji,

आपका समर्थन पाकर कृतार्थ हुआ.

S.N SHUKLA said...

Sada ji,
Roopchandra Shastri ji,
Anawar Jamal ji,
Imaran Ansari ji,

आपकी स्नेहिल शुभकामनाएं मिलीं , आभार.

S.N SHUKLA said...

Sangita ji,

स्नेह मिला, समर्थन पाकर कृतार्थ हुआ.

S.N SHUKLA said...

Anita ji,
Satish Saxena ji,
Kumar ji,
Rewa ji,

यह स्नेह सदैव इसी तरह मिलता रहे, यही आकांक्षा है.

S.N SHUKLA said...

Navin Mani Tripathi ji,
Surendra Shukla ji,

आपकी स्नेहिल शुभकामनाओं का आभार.

सम्पजन्य said...

आपकी १५० वीं पोस्ट और आपका स्नेहिल आमंत्रण मोहित कर गया ... मिलते रहेंगे ... शुक्रिया !!

Vibha Rani Shrivastava said...

तपिश के डर से , छाँव खोजते होंगे कोई(और) ....
हम तपिश हो भी तो , शोलों को हवा देते है....

तभी तो आप यहाँ तक आ पहुंचे .... !!
1सेंचुरी + हाफ सेंचरी = डेढ़ सेंचुरी की हार्दिक बधाई और बहुत-बहुत शुभकामनाएं .... !!

shalini said...

आदरणीय शुक्ला जी,
सर्वप्रथम तो १५० वीं ब्लॉग पोस्ट पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें ..... आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की आपकी रचनाओं का रसास्वादन हम हमेशा इसी प्रकार करते रहेंगे .....रचना वाकई बेहद खूबसूरत है ...हरेक शेर लाजवाब लिखा है आपने
टूटते ख़्वाब,तो होता है दर्द हमको भी,
हम तो किरचों को भी,पलकों पे उठा लेते हैं ...... यह शेर विशेष रूप से पसंद आया.

sushila said...

150 वीं पोस्ट के लिए बधाई ! आपकी गज़ल भी बहुत शानदार है हर एक शेर ओज से भरा हुआ!
बहुत ही उम्दा भाव !

Kunwar Kusumesh said...

150 पोस्ट होने की हार्दिक बधाई.

dinesh aggarwal said...

दिल के जख्म को मुस्कराहट में छुपाने वाले,
जिन्दगी को जिन्दगी की तरह निभाने वाले,
ख्वाब टूटने के लिये ही होते हैं दर्द क्यों,
आप हैं किरचों को भी, पलकों से उठाने वाले,
हर बात पर हाँ में हाँ नहीं मिलाते जानता हूँ,
बुराई के आगे सर नहीं हो झकाने वाले,
तेरी तारीफ किन शब्दों में करूँ दोस्त,
शुक्ल जी हैं धूप को छाँव बनाने वाले,
कवि की ताकत से मैं सुपरिचित हूँ,
जो है भ्रष्टाचार के समुन्दर को सुखाने वाले,
150वीं पोस्ट पर मेरी बधाई स्वीकार करें,
अपनी रचनाओं से देश को जगाने वाले,

आशीष तिवारी said...

sundar prastuti

S.N SHUKLA said...

Sampajany ji,
Vibha ji,
Shalini ji,
Abhaaree hoon apake sneh kaa.

S.N SHUKLA said...

Sushila ji,
Kunwar Kusumesh ji,
Apakee shubhakaamanaaon ka aabhaar.

S.N SHUKLA said...

Dinesh Agrawal ji,
Ashish Tewari ji,
apaka sneh aur samarthan mila, abhari hoon.

Saras said...

टूटते ख्वाब तो होता है दर्द हमको भी
हम तो किरचों को भी पल्कोंसे उठा लेते हैं ....

बहुत सुन्दर ......!!!!
और १५०वि पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकारें .....!!!!!!

रचना दीक्षित said...

दिल के जख्मों को तबस्सुम से छुपा लेते हैं /
ज़िंदगी जीते हैं , कैसे भी निभा लेते हैं /

वाह बहुत सुंदर अशआर. १५० वीं पोस्ट के लिये शुभकामनायें.

dheerendra said...

१५० वी पोस्ट को पोस्ट करने बहुत२ बधाई...
वाह!!!!बहुत सुंदर प्रस्तुति,..प्रभावी रचना,..

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

S.N SHUKLA said...

Saras ji,
Rachana Dixit ji,
aap mitron kaa bahut- bahut aabhaar.

S.N SHUKLA said...

Dheerendra ji,


aabhaaree hoon is sneh kaa.

Sunitamohan said...

ek aur sundar gazal aur ek khoobsurat gazal sangrah ke liye dheron badhai...!

anand jha said...

accha hai

पंछी said...

sundar prastuti

मत भेद न बने मन भेद - A post for all bloggers

रजनीश तिवारी said...

बेहतरीन प्रस्तुति ...

S.N SHUKLA said...

Sunita Mohan ji,
Anand jha ji,
Ap shubhachintakon ka bahut- bahut aabhar .

S.N SHUKLA said...

Pankshi ji,
Rajnish Tewari ji,

aap mitron kaa sneh mila, aabhaaree hoon.